DAV Class 3 Chapter 3 Elephant and Bird
हाथी और चिड़िया (Elephant and Bird)
Hello students, I have shared हाथी और चिड़िया (Elephant and Bird) story in Hindi and English.
हाथी और चिड़िया (Elephant and Bird)
एक हाथी और एक चिड़िया में झगड़ा हो गया। हुआ यूँ कि एक दिन चिड़िया अपने लिए एक नया घोंसला बना रही थी। यहाँ-वहाँ से तिनका इकट्ठे कर रही थी। एक बार में वह एक ही तिनका उठा पाती थी। वह तिनका पकड़ती, उड़ती और पेड़ की डाली पर रख आती।
An elephant and a bird had a fight. One day, the bird was building a new nest. She was collecting twigs from here and there. She could carry only one twig at a time. She would pick a twig, fly, and place it on a branch of a tree.
उसे बार-बार यह करते देख हाथी को हँसी आ गई। वह चिड़िया पर हँसता हुआ बोला- “बेचारी, इतनी छोटी, इतनी कमज़ोर है कि एक से ज्यादा तिनका उठा ही नहीं पाती। मुझे यदि ऐसे तिनके उठाने पड़ें तो मैं हज़ारों-लाखों तिनके एक बार में उठा सकता हूँ।”
Seeing her do this repeatedly, the elephant laughed. He said to the bird, “Poor thing, you are so small and weak that you can’t carry more than one twig. If I had to carry twigs like this, I could lift thousands at once.”
घोंसला बनाने के लिए चिड़िया ने धरती पर गिरा पत्ता उठाना चाहा। पत्ता कुछ बड़ा था। उससे उठ ही नहीं रहा था। बार-बार उसके मुँह से पत्ता ज़मीन पर गिर जाता।
While building her nest, the bird tried to pick up a fallen leaf. The leaf was a bit large. She couldn’t lift it. It kept falling from her beak again and again.
यह देखकर तो हाथी को खूब हँसी आई। हँसते-हँसते बोला- “कुदरत ने तुम्हें बनाने में खूब कंजूसी दिखाई है। एक पत्ता तक तुमसे नहीं उठता है। मैं चाहूँ तो इस पूरे पेड़ को उखाड़कर उठा सकता हूँ। क्या तुम ऐसा कर सकती हो?”
Seeing this, the elephant laughed even more. Laughing, he said, “Nature has been very stingy while making you. You can’t even lift a single leaf. If I want, I can uproot this entire tree. Can you do that?”
“मैं ऐसा क्यों करूँगी? यदि पेड़ को उखाड़ा जाए तो उस पर रहने वाले कितने ही पक्षियों के घर उजड़ जाएँगे। एक पेड़ को बनने में कम-से-कम दस वर्ष लग जाते हैं।”
“Why would I do that? If the tree is uprooted, many birds living on it will lose their homes. It takes at least ten years for a tree to grow,” replied the bird.
हाथी को गुस्सा आ गया। वह बोला- “चिड़िया की बच्ची, तुम बहुत ज्यादा चीं-चीं करती हो। तुमने तिनके और पत्ता उठाकर मेरे सामने अपनी ताकत दिखाई है। मैं भी अपनी ताकत दिखाऊँगा।”
The elephant got angry. He said, “Little bird, you chirp too much. You have shown me your strength by lifting twigs and a leaf. Now I will show you my strength.”
यह कहकर हाथी ने एक पेड़ के तने पर अपनी सूँड़ लपेटी और उसे उखाड़ने लगा। चिड़िया ना-ना करती रही, पर हाथी पेड़ को उखाड़कर ही माना।
Saying this, the elephant wrapped his trunk around the trunk of a tree and started uprooting it. The bird kept saying no, but the elephant uprooted the tree anyway.
पेड़ पर बने पक्षियों के घोंसले नीचे गिरने लगे। वहाँ पक्षियों की चीखें सुनाई देने लगीं। हाथी ने यहीं बस नहीं की, उसने पेड़ को अपनी पीठ पर टिकाया और यहाँ-वहाँ घूमने लगा। यह देखकर चिड़िया ने दुख के मारे अपनी आँखें बंद कर लीं।
The nests on the tree started falling. The cries of birds were heard all around. The elephant didn’t stop there. He placed the tree on his back and roamed around. Seeing this, the bird closed her eyes in sorrow.
पर वहाँ एक आदमी भी था। आदमी ने अपनी आँखें बंद नहीं की थीं। वह हाथी की ताकत देखकर पहले तो हैरान हुआ। फिर उसकी ताकत का उपयोग सोचकर प्रसन्न हो गया। अब आदमी ने और भी कई हाथियों को वश में किया और उन्हें सामान ढोने के काम पर लगा दिया।
But there was also a man there. He did not close his eyes. At first, he was amazed by the elephant’s strength. Then, thinking about how to use that strength, he became happy. He trained more elephants and put them to work carrying loads.
सभी हाथी उस पहले हाथी पर नाराज़ होने लगे। पहला हाथी बोला- “मुझे भी इसका अफसोस है।”
All the elephants started getting angry at the first elephant. The first elephant said, “I also regret it.”
– गोविंद शर्मा (Govind Sharma)